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Dr.A.Kumarr

नेताओं की नीचता

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भारतीय राजनीति कौरवों सी हो गई। लोक लाज नेताओं की जाने कहाँ खो गई।। भूखे भेड़िए हो जैसे सड़ा मांस नोचते। वैसे एक दूसरे पे सभी कीचड़ झोंकते।। चीखें गूँजे संसद में बस म्याऊँ म्याऊँ की। नेताओं के बीच लगी होड़ काँऊ काँऊ की।। इतना बड़ा पेट पूरा देश ये खा जाएँगे। मरने के बाद अपने साथ में ले जाएँगे।। वोट इन्हें दे दो यारों चाहे थाली खाली दो। शर्म इन्हें आती नही चाहे जितनी गाली दो।। भरने को पेट इनका सिर्फ वोट चाहिए। नारियों के जिस्म का बना लँगोट चाहिए।। भौंकते हैं खूब ये और काट लेते हैं थूकते हैं हाथ पर खुद ही चाट लेते हैं।         अमन शुक्ला शशांक      पचपेड़वा-लखीमपुर-खीरी 9721842302,6386998171 akshukla7890@gmail.com

राम धमनियों में बहते अतुलित रक्त का हैं प्रवाह।

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राम धमनियों में बहते अतुलित रक्त का हैं प्रवाह। राम बसे अंतस में मेरे  मेरी सांसे हैं गवाह।। हैं राम धरा और राम गगन और राम मिलेंगे चहूँ ओर। मन का कुहास जो हट जाए तो दिखेंगे चहूँ ओर।। राम मिलेंगे तुमको भी जो सबरी माता को जानो। राम मिलेंगे तुमको भी पहले तुम खुद को पहचानो।। मन को पापी करने वालों राम न ऐसे दिखते हैं। जीवन श्रापी करने वालों राम न ऐसे दिखते हैं।। राम के दर्शन पाने को खुद पुण्य कमाना पड़ता है। दुनिया के असहायों पर खुद प्रेम लुटाना पड़ता है।। राम के दर्शन पाने को मर्यादा,आदर्श जगाना पड़ता है। राम के दर्शन पाने को ,खुद को राम बनाना पड़ता है।। Dr Aman shukla "Shashank" Book a show :- 9721842302

शाम होते ही तेरा इंतजार है

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मेरा दिल तेरा तलबगार है। कैसी बेवफाई तेरा कैसा प्यार है।। मैं तुझसे दूर जाना चाहता हूं मगर। शाम होते ही तेरा इंतजार है।। डॉ. अमन शुक्ला शशांक

मुक्तक

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मॉल सस्ता है तू तू हजारी नही। हारने वाली खेली मैंने पारी नही तुझे साथ लेकर मैं जाता मगर। क्या करूं अब तू कुंवारी नहीं।। डॉ. अमन शुक्ला शशांक

मुक्तक

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गले से जो नही उतरे हम ऐसा जाम लेते हैं। सुबह से शाम तक हम तो तेरा ही नाम लेते हैं। ये तुझसे दूर रहने की मेरी कैसी है मजबूरी। तेरी जब याद आती है तो दिल को थाम लेते हैं।। डॉ. अमन शुक्ला शशांक