मुक्तक

मॉल सस्ता है तू तू हजारी नही।
हारने वाली खेली मैंने पारी नही
तुझे साथ लेकर मैं जाता मगर।
क्या करूं अब तू कुंवारी नहीं।।
डॉ.अमन शुक्ला शशांक

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

राम जी पे प्रश्न चिन्ह

सड़ा हुआ कानून

राम धमनियों में बहते अतुलित रक्त का हैं प्रवाह।