मुक्तक

गले से जो नही उतरे हम ऐसा जाम लेते हैं।
सुबह से शाम तक हम तो तेरा ही नाम लेते हैं।
ये तुझसे दूर रहने की मेरी कैसी है मजबूरी।
तेरी जब याद आती है तो दिल को थाम लेते हैं।।
डॉ. अमन शुक्ला शशांक

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