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मुक्तक

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ये मिट्टी हमारे वतन की है जोगी। ये हीरे के जैसे रतन सी है जोगी।। अरे इसमें तो लाखों नगीने छुपे हैं। राष्ट्रभक्ति के जैसे शेखर भी है जोगी।। डॉ.अमन शुक्ला शशांक 

राम जी पे प्रश्न चिन्ह

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राम राम राम राम राम जपता हूं सदा, मुझको पता है राम नाम क्या चीज हैं। राम जी के नाम पर वही करें राजनीति, बुद्धिमत्ता वाले ताले जिनके सभी सीज हैं।। राम जी के जन्म का प्रमाण मांगते हैं,उल्लू, बातें उतनी करेंगे जितनी तमीज है। राम जी पे प्रश्न चिन्ह जितने लगाते सब, निशाचरी प्रवत्ति के सारे रक्तबीज हैं।। डॉ.अमन शुक्ला शशांक

छंद मनहरण घनाक्षरी

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दो_मनहरण_घनाक्षरी_आप_सबके_समझ_प्रस्तुत_हैं। (१) शब्द शब्द चुनकर, गीत का सृजन किया, मनके पिरोये गए, जैसे किसी माला में। मातु भारती के लिए, लेखनी उठाई मैने,  शांति क्रांति लिखूं जैसे, किसी पाठशाला में।। गीत लिखता हूं मातृभूमि की परम्परा के,  आहुति प्रदान करूँ, धर्म यज्ञशाला में। राष्ट्रभक्ति रग-रग, बसी मेरे रक्त में है,  बिकता नही हूं कभी, शाल या दुशाला में।। (२) गोरों का जो अत्याचार झेले तो उन्हें लिखा है, जेलों में लिखी गई कहानियों को  लिखा है। मेरी लेखनी में अशफ़ाक भी दिखेंगे तुम्हें, सावर के जैसी जिंदगानियों को लिखा है।। शेखर को लिखा मैने व लिखा सुभाष को भी, पन्ना,और झांसी वाली रानियों को  लिखा है। देश को बचाने हेतु झूल गए फांसी पे जो, मैने ऐसी सभी कुरबानियों को  लिखा है।।            डॉ.अमन शुक्ला शशांक Book A SHOW__9721842302

मुक्तक

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जफा हो इश्क में साहब तो केवल जान जाती है। मुक्कमल आशिकी हो तो तेरी पहचान जाती है।। मोहब्बत सारी दुनिया में नही इसकी तरह कोई। जरा सा पास में बैठो तो जननी मान जाती है।। डॉ.अमन शुक्ला शशांक