मुक्तक

ये मिट्टी हमारे वतन की है जोगी।
ये हीरे के जैसे रतन सी है जोगी।।
अरे इसमें तो लाखों नगीने छुपे हैं।
राष्ट्रभक्ति के जैसे शेखर भी है जोगी।।
डॉ.अमन शुक्ला शशांक 

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