हने पर हना पुण्य न पाप।
अरे हिंदुओं आखिर कब तक सोओगे।
एक एक करके अपने हिंदू भाई खोओगे।।
आग लगाई चहुँ ओर इस्लामी ठेकेदारों ने।
दाग लगाया भारत मां के दामन पर गद्दारों ने।।
जो केवल हूरों के खातिर सबका खून बहाते हैं।
आखिर उनको हम क्यों अपना भाई जान बताते हैं।।
अब्दुल कलाम जैसे लोगों का ये सम्मान नही करते।
जिस छाती का रक्त पिया उसका गुणगान नही करते।।
हिंदू कब तक कायर होकर अपने घर में बेठोगे।
अपनी बहन बेटियों की तुम इज्जत लूटता देखोगे।।
एकता में कितना बल होता इसे दिखाओ भाई आप।
रण में कूदो एकजुट होकर करना नही पड़े संताप।।
ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य शूद्र वाले सब बंधन तोड़ो।
अब बंटने का वक्त नहीं है,हीन भावना को छोड़ो।।
गद्दारों की कभी मित्रता अपने सर न चढ़ने दो।
दयाधर्म रखो ताखे पर रक्तबीज न बढ़ने दो।।
दुष्टों का संहार करो तो लगता नहीं कभी कोई शाप।
इनका केवल इक उपाय है हने पर हना पुण्य न पाप।।
डरता दोजख जाने से जो , उसको जन्नत दे दो तुम।
जिसको जिहाद अति से प्यारा है बलिवेदी पे भेजो तुम।।
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